Tuesday, 24 January 2012
ये किस सफ़र के किस्से सुना रहे हैं लोग
मेरी जीत पर मातम मना रहे हैं लोग
जिन्दा रह के भी जो तडपा हो उम्र भर
उसी की मौत को खबर बना रहे हैं लोग
जो अपने घर में भी ख़ुशी ला नही सकते
जमाने को खुश करने का परचम उठा रहे हैं लोग
इश्क को जो तौला करते हैं किताबों के नाम पर
पंचायतों से इश्क करना सिखा रहे हैं लोग
इन सवालों को यूँ ही जिन्दा रखना 'अतम'
सवाल पूछने पे भी सवाल उठा रहे हैं लोग
- अभिषेक ठाकुर
Friday, 2 December 2011
बिन मुड़े ही जिस शख्स ने तोड़े रिश्ते
मैं अब भी उसके लौट आने के इंतजार में हूँ
इस शहर की भीड़ में खो चुका खुद को
मकां के घर में बदल जाने के इंतजार में हूँ
अभी से उसके बारे में बोल दूं कैसे?
... उसके नकाबों के उतर जाने के इंतजार में हूँ
जिस समन्दर ने मेरी कश्ती को डूबो रखा है
उसी समन्दर के उफ़न जाने के इंतजार में हूँ
मैं उनके इश्क में जाने कब का मिट भी चुका
जो कहते हैं तेरे गुजर जाने के इंतजार में हूँ
जिन दरख्तों के साथ बचपन का नाता हो
कैसे कह दूं कि उनके ढह जाने के इंतजार में हूँ
अब के बच्चों ने सवाल करना छोड़ दिया
किसी मासूम से सवाल के इंतजार में हूँ
- अभिषेक ठाकुर
Monday, 28 November 2011
अक्सर तुम मुझसे कहा करती थी
सब कुछ बदल जाता है
वक़्त की आंधी उड़ा देती है सब कुछ
लेकिन आकर देखो प्रिय
मैं अब भी वैसा ही हूँ
कुछ बनाने की कोशिश में
घर के बर्तन अब भी टूटा करते हैं
भूखे पेट सो जाता हूँ चुपचाप
तुम्हारा नाम उखड़े प्लास्टर के बीच
अब भी वैसा ही चमका करता है
तुम्हारे हाथों के निशान
अब भी मुझे देखा करते हैं
घडी की सुइयों में
वक़्त को खोजते हुए.
-अभिषेक ठाकुर
सब कुछ बदल जाता है
वक़्त की आंधी उड़ा देती है सब कुछ
लेकिन आकर देखो प्रिय
मैं अब भी वैसा ही हूँ
कुछ बनाने की कोशिश में
घर के बर्तन अब भी टूटा करते हैं
भूखे पेट सो जाता हूँ चुपचाप
तुम्हारा नाम उखड़े प्लास्टर के बीच
अब भी वैसा ही चमका करता है
तुम्हारे हाथों के निशान
अब भी मुझे देखा करते हैं
घडी की सुइयों में
वक़्त को खोजते हुए.
-अभिषेक ठाकुर
Subscribe to:
Posts (Atom)