Tuesday, 15 November 2011

समय नहीं बीता करता
मानदंड बदल गये हैं
तुम्हारे होने के बाद
समय निरपेक्ष था ही नहीं कभी
... खेला करता है नित खेल अक्सर
तुम्हारे पास होने पर घंटे क्षणों में बदल जाया करते हैं
और तुम्हारे बिना रातें बन जाती हैं अनंतता का पर्याय
पर इस अनंत यात्रा को पकड़ने की कोशिश
दे देती है जन्म अहंकार और मोह को
यकीन करो साथी
समय बस अलग अस्तित्वों को ही छू पाता है
प्रेम हमेशा से रहा है
कालातीत

- अभिषेक ठाकुर

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